Friday, October 22, 2010

नक्सलवाद



पत्रिका, रायपुर, २१ अक्टूबर

Monday, February 1, 2010

सबसे ज्यादा IAS व IPS भी बिहारी


राजद के पूर्व सांसद साधु यादव के अनुसार बिहारी अपने काम, मेहनत और हिम्मत के लिए देश में ही नहीं, विदेशों में भी जाने और पहचाने जाते हैं। यदि देश में बिहारी मजदूरों की संख्या ज्यादा है, तो यह भी नहीं भूलना चाहिए कि सबसे ज्यादा IAS और IPS भी बिहार के ही हैं। पिछले दिनों रायपुर दौरे पर आए श्री यादव ने विभिन्न् मुद्दों पर विचार से बात हुई।
0 छत्तीसगढ़ और बिहार में क्या समानता देखते हैं?
00 दोनों राज्यों के लोग सीधे-सरल, मिलनसार और मेहनती हैं। इसी दम पर उन्हें पहचाना जाता है। छत्तीसगढ़ की संस्कृति को अभी ज्यादा करीब से देखने का मौका तो नहीं मिला है, लेकिन जो कुछ भी देखा-सुना है। वह काफी कुछ बिहार जैसा ही है।
0 छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के भविष्य को लेकर क्या सोचते हैं?
00 छत्तीगढ़ ही नहीं पूरे देश में कांग्रेस का भविष्य उज्जवल है। यहाँ हुए विधानसभा उपचुनाव और नगरीय निकाय चुनावों के रिजल्ट की हमें जानकारी मिली है। इसमें पार्टी का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा है। धीरे-धीरे लोग वापस कांग्रेस पार्टी की तरफ रूख कर रहे हैं। प्रदेश में अगली सरकार कांग्रेस की ही बनेगी।
0 यहाँ पार्टी के अंदर काफी गुटबाजी है?
00 देखिए कांग्रेस सबसे पुरानी और सबसे बड़ी पार्टी है। इसमें कई बड़े नेता है। सभी के समर्थक भी हैं। उनके सोचने और काम करने का तरीका अलग-अलग हो सकता है, लेकिन उसे गुटबाजी नहीं कहा जा सकता। सभी की नीति और रीति कांग्रेस के हीत में ही रहती है।
0 राहुल गाँधी की सक्रियता का पार्टी पर क्या असर पड़ रहा है?
00 राहुल जी कांग्रेस के युवा नेतृत्व हैं। उनके मागदर्शन में कांग्रेस का तेजी से जनाधार बढ़ रहा है। इसका असर हमने उत्तर प्रदेश से लेकर दूसरे कई राज्यो में देखा है। उनकी सक्रियता से पार्टी में युवाओं का जुड़ाव और लगाव दोनों बढ़ा है। उन्हीं की कोशिशों का नतीजा है कि कांग्रेस अपने पुराने तेवर में लौट रही है।
0 दलबदल के बाद आप चुनाव हार गए?
00 राजनीतिक जीवन में चुनाव में हार-जीत चलता रहता है। जहाँ तक पिछले चुनाव का सवाल है, तो परिसिमन की वजह से मेरा क्षेत्र बदल गया। हमारी राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी के निर्देश पर मैंने चुनाव की तैयार की, वह भी अपने क्षेत्र से करीब 150 किमी दूर जाकर दूसरी सीट से चुनाव लड़ा। कम वक्त और तैयारी के बावजूद हमने अच्छी टक्कर दी।
0 बिहार में कांग्रेस समाप्ति की ओर है?
00 यह आप कैसे कह सकते हैं। बिहार में कांग्रेस तेजी से प्रगति कर रही है। यह केवल दावा नहीं है, बल्कि लोकसभा चुनाव के परिणाम में यह साबित भी हुआ है। तमाम दलों की मौजूदगी के बावजूद इस बार चुनाव में कांग्रस का वोटिंग प्रतिशत बढ़ा है। विधानसभा चुनाव में निश्चित रूप से हम और बेहतर प्रदर्शन करेंगे।
0 बिहार में इसी वर्ष विधानसभा चुनाव होना है? तैयारी कैसी चल रही है?
00 हाँ, हम और हमारी पार्टी इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं। सदस्यता अभियान के माध्यम से हम अधिक से अधिक संख्या में लोगों को पार्टी से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। वैसे तो बिहार में कांग्रेस की जड़े पुरानी हैं, लेकिन बीच में परिस्थिति बदल गई थी। अब हालात बदल गए हैं। कांग्रेस फिर से उभर कर आ रही है।
0 बिहार की एनडीए सरकार अच्छा काम कर रही है?
00 विज्ञापन और झूठे प्रचार देखकर बिहार से बाहर बैठे लोग ऐसा कह सकते हैं, लेकिन सच्चाई जानना है तो वहाँ जाकर देखना पड़ेगा। पूरी सरकार एक वर्ग विशेष के कब्जे में हैं। आम लोगों के हित में कोई काम नहीं हो रहा है। सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं से लोग महस्र्म हैं। सड़क और बिजली की स्थिति इतना खस्ताहाल है कि राजधानी के लोग त्रस्त हैं, तो बाकी प्रदेश की स्थिति क्या होगी इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
0 एनडीए के राज में कानून-व्यवस्था स्थिति को आप कैसे देखते हैं?
00 जिस प्रदेश की राजधानी में दिनदहाड़े अपहरण और हत्या की वारदातें हो रही हो, वहाँ के कानून- व्यवस्था के विषय में क्या कहा जा सकता है। पहले लोग कहते थे बिहार में जंगल राज है, लेकिन अब वहाँ महा जंगल राज हो गया है। लोग अपने घरों में सुरक्षित नहीं है। बहु-बेटियों का रास्ता चलना कठिन हो गया है। एनडीए सरकार पूरी तरह फेल हो गई है। उसके कुशासन से जनता त्रस्त है, जिसका परिणाम उसे विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ेगा।
0 बिहार सरकार का आरोप है कि केंद्र से सहयोग नहीं मिलता?
00 यूपीए सरकार सहयोग नहीं करती तो बिहार की एनडीए सरकार आज तक खड़ी नहीं रहती। बाढ़ पीड़ितों की सहायता से लेकर हर समय एनडीए सरकार ने बिहार सरकार की भरपूर सहायता की है। यूपीए सरकार ने विभिन्न् योजनाओं और मदों में करोड़ों स्र्पए वहाँ की सरकार को दिया है, लेकिन यह उनकी अक्षमता है कि वे इस पैसे और सहयोग का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।
0 देश के अंदर ही बिहारी बेगाने होते जा रहे हैं?
00 भारत एक लोकतांत्रिक देश है, कश्मीर से लेकर कन्यकुमारी तक देश एक है। बिहारी भी इसी देश के नागरीक हैं। उन्हें भी दूसरे प्रांतो में जाने का अधिकार है। कुछ छोटी मानसिकता के लोग हैं, जो प्रांत और जाति के नाम पर देश को बांटने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
0 महाराष्ट्र और हरियाणा सहित कई राज्यों में उन पर हमले हो रहे हैं?
00 मैंने कहा न यह सब छोटी और ओछी मानसिकता के लोगों की कायरना करतूत है। क्या बिहार में दूसरे प्रांतो के लोग नहीं रहते। हम तो बिहार में किसी का विरोध नहीं करते। बिहारी अपनी मेहनत और ईमानदारी के दम पर जीते हैं। कई राज्यों की पूरी अर्थव्यवस्था उन्हीं पर टिकी है। इनमें महाराष्ट्र, हिरयाणा और पंजाब भी शामिल हैं। अगर बिहारी इन राज्यों से हट जाएँ तो ये राज्य ठप हो जाएँगे। विदेशों में भी बिहार का डंका बता है।
0 छत्तीसगढ़ व अन्य राज्यों में होने वाली बड़ी वारदातों में अक्सर बिहारियों गिरोह का नाम आता है? क्या वहाँ केवल अपराधी ही रहते हैं?
00 देखिए आरोप लगाने वाले कुछ भी कह सकते हैं, भारत स्वतंत्र देश है यहाँ हर किसी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, इसलिए किसी को कुछ भी बोलने से नहीं रोका जा सकता। हाँ, बिहार का नाम केवल आपराध के लिए लेने वालों को यह भी नहीं भूलना चाहिए कि देशभर में सबसे ज्यादा आईएएस और आईपीएस अफसर भी उसी बिहार से आते हैं। देश की कई सर्वोच्च संस्थाओं में बिहारी ही प्रशासक हैं।

Thursday, September 10, 2009

मैं हवा हू

मैं हवा हू, जो स्र्कता नहीं, कभी थमता नहीं,
किसी एक का होता नहीं,
अपनी ही मस्ती में, मस्त हो चल देता हू,
राह में मिले जो भी चुपके से उसे छेड़ देता हू,
फिर चल देता हू,
मैं हवा हू, जो स्र्कता नहीं, कभी थमता नहीं,
खुशबू के साथ मिल महका देता हू चमन को,
गर्म हो मौसम कितना भी पल में ठंडक ला देता हू,
मुझे छूओं मत महसूस करो...
मैं हवा हू, जो स्र्कता नहीं
न रोको मुझे दीवारों से, न बांधों मुझे बंधनों में,
स्र्कना, बंधना मेरी फितरत नहीं,
इसलिए तो पागल आवारा कहलाता हू,
मेरे पास आने की कोशिश भी न करना,
वरना विलिन हो जाओगे अकाश में,
उस आकाश में जो झूकता तो है पर गिरता नहीं,
आभास होकर भी धरती से कहीं मिलता नहीं,
मैं हवा हू, जो स्र्कता नहीं, कभी थमता नहीं

Sunday, May 3, 2009

सेवा में मेवा

जनता के सामने हाथ जोड़कर एक-एक वोट की भीख मॉंग रहे, नेता सांसद बनते ही लखपति हो जाएंगे। चुनाव जीतते ही उन्हें मोटी पगार के साथ अन्य सुविधाऍं मिलने लगती हैं। इतना ही नहीं एक बार सांसद बनने मात्र से जीवनभर के आय का एक अच्छा साधन बन जाता है। सांसदों को हर महीने 16 हजार स्र्पए वेतन मिलता है। इसके साथ ही संसदीय क्षेत्र में खर्च करने के लिए उन्हें महीनें में 20 हजार स्र्पए मिलता है। टेलीफोन और मोबाइल की मुफ्त सेवा के साथ महज 150 स्र्पए की मासिक भुगतान कर देश के बड़े-बड़े अस्पतालों में इलाज कराने की सुविधा भी मिल जाती है। सांसदों को हर माह सोलह हजार रुपये वेतन मिलता है। सदन का कोई सत्र अथवा संसद की किसी समिति की कोई बैठक में शामिल होने के लिए एक हजार स्र्पए दैनिक भत्ता दिया जाता है। प्रत्येक संसद सदस्य 20,000 रुपये प्रति माह की दर से कार्यालय-व्यय भत्ता मिलता है जिसमें से चार हजार रुपये लेखन सामग्री मदों पर होने वाले व्यय, दो हजार रुपये पत्रों की फ्रैंकिंग पर होने वाले व्यय शामिल है।सांसदों को दिल्ली में सरकारी आवास उपलब्ध कराया जाता है। आवासों का आवंटन लोक सभा की आवास समिति की आवास उप समिति द्वारा किया जाता है। यदि किसी सांसद को उसके अनुरोध पर आवास के रूप में बंगला का आबंटन किया जाता है तो वह संपूर्ण सामान्य लाइसेंस शुल्क का भुगतान करना पड़ता है। प्रत्येक सदस्य के दिल्ली में आबंटित आवास पर पहली हर वर्ष 1 जनवरी से चार हजार किली पानी तथा 50,000 यूनिट तक बिजली (25000 यूनिट लाइट मीटर पर तथा 25,000 यूनिट पावर मीटर पर अथवा दोनों को मिलकार) नि:शुल्क दिया जाता है। यह सुविधा दिल्ली में निजी आवास में रहने वाले सदस्य को भी दी जाती हैं।यात्रा भत्ता व सुविधाएंसभी सांसदों को वातानुकूलित प्रथम श्रेणी अथवा एक्जिक्यूटिव श्रेणी का एक नि:शुल्क अहस्तांतरणीय रेल पास जारी किया जाता है, जिससे वे भारत में किसी भी ट्रेन से किसी भी समय यात्रा कर सकते हैं। सहचर के लिए द्वितीय श्रेणी का एक पास भी दिया जाता है। हाई यात्रा की स्थिति में यात्रा के लिए वायुयान के टिकट का किराया दिया जाता है। सड़क मार्ग से यात्रा की स्थिति में 13 स्र्पए प्रति किलोमीटर के हिसाब से भत्ता दिया जाता है। इसके अतिरिक्त सांसदों को सत्र/अंतरसत्रावधि के दौरान पति या पत्नी अथवा कितनी ही संख्या में अपने सहचरों या संबंधियों के साथ एक वर्ष में 34 हवाई यात्राएं करने की सुविधा प्रदान की गई है। पति, पत्नी को सुविधाऍं सांसद के गृह निवास स्थान से दिल्ली तक आने जाने के लिए प्रत्येक सत्र के दौरान एक बार तथा बजट सत्र के दौरान दो बार लेकिन एक वर्ष में 8 बार नि:शुल्क वातानुकूलित प्रथम श्रेणी अथवा एक्जिक्यूटिव श्रेणी में किसी ट्रेन यात्रा। वायुमार्ग द्वारा की जाती है तो विमान किराए के बराबर धनराशि। सोफा कवर और पर्दे की हर तीन महीने में धुलाई, टिकाऊ फर्नीचर के संबंध में 60,000 रुपये मूल्य तक और गैर-टिकाऊ फर्नीचर के संबंध में 15000 रुपये मूल्य तक की विद्यमान वित्तीय सीमा के भीतर फर्नीचर और इसमें किए गए किसी सुधार या परिवर्धन या फर्नीचर, विद्युत उपकरण और अन्य सेवाओं के रूप में दी गई कोई अतिरिक्त सेवा के कारण किराए में 25 प्रतिशत की छूट शामिल है। वाहन खरीदने की सुविधा सांसद को इच्छित वाहन क्रय करने के लिए एक लाख रुपये या वाहन का वास्तविक मूल्य,जो भी कम हो, बतौर अग्रिम दिया जाता है। इसकी वसूली 11.5 प्रतिशत ब्याज दर से की जाती है।

Friday, April 10, 2009

लोगों को जगाने आग पर चल रहे डीजीपी विश्वरंजन

छत्तीसगढ़ पुलिस ने अंधविश्वास को दूर करने के लिए मुहिम शुरू किया है। अभियान को सफल बनाने के लिए पुलिस 20 हजार स्व्यं सेवकों की फौज तैयार कर रही है, जो प्रदेश के कोने-कोने में जाकर लोगों को जागृत करेंगे। फिहलहाल इन स्वयं सेवकों के प्रशिक्षण का दौर चल रही है। लंबी छुट्टी पर होने के बावजूद डीजीपी विश्वरंजन खुद इसकी कामन संभाल रहे। अंधविश्वास के खिलाफ समाज को खड़ा करने वे खुद नंगे पैर आग पर चल रहे हैं। सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में उन्होंने रायगढ़ में यह कारनामा किया। छत्तीसगढ़ में महिलाओं पर टोनही (डायन) का आरोप लगाकर उसे प्रताड़ित करने की सैकड़ों घटनाऍं हो चुकी हैं। सरकार द्वारा इसके खिलाफ कानून बनाए जाने के बावजूद महिलाओं महिलाओं को प्रताड़ित करने वाले समाज के ठेकेदारों पर कोई असर नहीं पड़ा। इसे देखते हुए डीजीपी विश्वरंजन ने जनजागरण की मुहिम शुरू की है। राजय पुलिस ने वर्ष 2009 में टोनही प्रकरणों की दर को शून्य पर स्थिर करने तथा अंधविश्वास आधारित अपराधों के नियंत्रण के लिए विशेष अभियान प्रारंभ किया है। इसके लिए पूरे राज्य में टास्क फोर्स का गठन किया जा रहा है। इसी के तहत रायगढ़ में कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें दो सौ से अधिक महिलाओं ने भी जादू-टोने के ट्रिक्स सीखे। दहकते अंगारे पर चलने के ट्रिक्स को करने में झिझक रहे थे। इसकी वजह से डीजीपी को खुद आगे आना पड़ा। उनके आग पर चलने के बाद वहॉं मौजूद सभी लोगों ने एक-एक कर इस ट्रिक्स को किया। विश्वरंजन ने बताया कि अंध विश्वास से जुड़ी घटनाओं को रोकने के लिए वृहद स्तर पर प्रयास किया जा रहा है। इसमें समाज से जुड़े लोगों के साथ पुलिस अधिकारियों और चयनित स्वयंसेवी कार्यकर्ताओं की सहायता ली जा रही। गॉंव-गॉंव में कार्य करने के लिए तैयार किए जा रहे स्वयंसेवी कार्यकर्ताओं को चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षित किया जा रहा है। प्रशिक्षण के लिए देशभर के विशेषज्ञों की सहायता ली जा रही है। वाह...वाही छत्तीसगढ़ पुलिस की इस मुहिम की देशभर में सराहना हो रही है। विदर्भ हिन्दी साहित्य सम्मेलन नागपुर के अध्यक्ष और वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता उमेश चौबे ने इस पहल को देश में अनूठा और अन्य राज्यों के लिए प्रेरणादायक बताया है। उन्होंने कहा कि इस मुहिम को शुरू करने वाले डीजीपी विश्वरंजन का समिति की तरफ से नागपुर में नागरिक अभिनंदन किया जाएगा। आगे आए दो और राज्य प्रदेश पुलिस की मुहिम में सहयोगी बनने यहॉं आए बिहार अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य भंते बुद्धप्रकाश और देशभर में अंधविश्वास आधारित सामाजिक अपराधों के खिलाफ मुहिम चलाने वाली संस्था अखिल भारतीय अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने छत्तीसगढ पुलिस के इस अभियान की कार्ययोजना को बिहार एवं महाराष्ट्र सरकार व पुलिस द्वारा लागू कराने का विश्वास जताया है ।

Thursday, December 11, 2008

अरबों स्र्पए का चुनाव

विधानसभा चुनाव में अरबों स्र्पए स्वाहा हो गए। राजनीतिक पार्टियों ने चुनाव प्रचार पर ही लगभग एक अरब स्र्पए उड़ा दिया है। वहीं, निष्पक्ष चुनाव कराने की जद्दोजहद में लगे निर्वाचन आयोग भी खर्च में पीछे नहीं है। हेलिकाप्टर पर चले नेता- चुनाव प्रचार के लिए दोनों प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने करीब 10 हेलिकॉप्टरों का उपयोग किया। लगभग 15 दिनों तक सभी हेलिकॉप्टर न केवल यहॉं के आसमान पर छाए रहे, बल्कि उनकी लैडिंग भी यहीं होती रही। हेलिकॉप्टरों को सभा स्थलों पर उतारने के लिए लैडिंग चार्ज तो लगा ही माना विमानतल पर उन्हें खड़ा रखने के लिए भी मोटी रकम खर्च करनी पड़ी है। उड़ान पर निकल गए लाखों- हेलिकॉप्टर की क्षमता और इंजन के आधार पर किराया 80 हजार से एक लाख स्र्पए प्रति घंटा भुगतान कराना पड़ा। हेलिकॉप्टर किराया पर उपलब्ध कराने वाली कंपनियॉं एक दिन में कम से कम तीन घंटे की उड़ान की शर्त के साथ सेवाऍं देती हैं। चुनाव प्रचार के लिए नेताओं नेधॅुंआधार उड़ान भरे। एक-एक हेलिकॉप्टर को औसतन तीन से पॉंच घंटे तक उड़ना पड़ा। इस तरह 15 दिनों तक चले चुनाव प्रचार में सभी हेलिकॉप्टरों ने करीब एक हजार घंटे उड़ान भरा। इसका किराया एक लाख स्र्पए प्रति घंटा के हिसाब से यह आंकड़ा करीब 10 करोड़ स्र्पए होता है। बैनर-पोस्टर पर अरबों - प्रदेश्र की 90 विधानसभा सीट के लिए एक हजार 66 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इनमें से 180 प्रत्याशी दोनों प्रमुख राजनीतिक पार्टियों से हैं, चुनाव आयोग के आदेशानुसार उनके लिए प्रचार में निर्धारित सीमा 25 लाख स्र्पए थी। शेष बचे 886 प्रत्याशियों द्वारा औसतन 10 से 12 लाख स्र्पए खर्च करने की जानकारी है। इसमें प्रत्याशियों द्वारा किए गए ऑन रिकॉर्ड खर्च जिसमें पम्पलेट, बैनर-पोस्टर, वाहन तथा अन्य व्यय शामिल हैं। सभी प्रत्याशियों ने कुल लगभग एक अरब स्र्पए चुनाव प्रचार पर ऑन रिकार्ड खर्च किया है।वेतन भत्ता 37 करोड़ - प्रदेश में चुनाव कराने के लिए निर्वाचन कार्यालय को बजट में 37 करोड़ स्र्पए दिए गए। इसमें मतदाता सूची के लिए तीन करोड़ स्र्पए भी शामिल है। इसके अतिरिक्त अधिकारियों-कर्मचारियों का वेतन भत्ता तथा कार्यालय व्यय आदि भी शामिल है। मतदान मंे लगे कर्मचारियों को मानदेय इसी मद से दिया जाएगा। अफसर भी उड़े हेलिकॉप्टर पर- चुनाव के लिए आयोग ने करीब 10 हेलिकॉप्टर किराए पर लिया था। इनका उपयोग मतदान दलों और सुरक्षाबलों और पर्यवेक्षकों को लाने-ले में किया गया। विभागीय सूत्रों के अनुसार आयोग द्वारा किराए पर लिए गए सभी हेलिकॉप्टर एयरफोर्स के हैं। उनका किराया व अन्य व्यय गृह मंत्रालय तय करता है। आयोग को अभी बिल नहीं मिला है, लेकिन करीब 10 से 12 करोड़ स्र्पए खर्च होने का अनुमान है। आवभगत पर मोटी रकम - आचार संहिता की घोषणा के बाद से अभी तक दिल्ली से मुख्य चुनाव आयोग कार्यालय से अफसरों का आना-जाना लगा हुआ है। इसके साथ ही पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी संभालने के लिए विभिन्न् राज्यों के तीन दर्जन से अधिक अफसर यहॉं आए हुए हैं। इनमें कई सचिव स्तर के आईएएस अफसर भी हैं। स्टेट्स के हिसाब से अफसरों के होटल व रेेस्ट हाउस में स्र्कने की व्यवस्था की गई। इस पर करीब चार से पॉंच लाख स्र्पए खर्च होने का अनुमान है। जल गया लाखों का ईंधन - अधिग्रहित वाहनों सहित चुनाव प्रचार में लगे वाहनों में लगभग 80 से 90 लाख स्र्पए का ईंधन जल गया। अकेले राजधानी के पुलिस पेट्रोल पंप से 50 लाख स्र्पए का डीजल और पेट्रोल दिया गया है। अलग-अलग जिलों में चुनाव कार्य में लगे वाहनों का ईंधन इसके अतिरिक्त है। वाहन किराया आठ करोड़ - चुनाव के दौरान मतदान दलों, सुरक्षाबलों तथा अफसरों के लिए करीब आठ हजार बड़ी-छोटी गाड़ियॉं अधिग्रहित की गई थीं। इसमें किराए पर लिए गए लक्जरी वाहन भी शामिल हैं। इन सभी वाहनों को आयोग की तरफ से निर्धारित दर पर किराया भुगतान किया जाएगा। इसका बजट लगभग आठ करोड़ स्र्पए तक होे सकता है। सुरक्षाबलों की आवाजाही लाखों का - चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए अर्द्ध सैनिक बलों की करीब 450 कंपनियॉं यहॉं बुलाई गई थी। अलग-अलग राज्यों और केन्द्र से पहुॅंचे सुरक्षाबलों पर करीब 12 लाख स्र्पए खर्च हुआ है। इसमें सुरक्षाबलों के एवज में दिया जाने वाला भुगतान सहित अन्य व्यय शामिल है।

Thursday, November 20, 2008

दिन में छिटपुट शाम में तनाव

जोगी के वाहन पर पथराव, गृहमंत्री ने कांग्रेस प्रत्याशी को तमाचा जड़ा
दूसरे चरण के मतदान के दौरान गुस्र्वार को प्रदेशभर में पूरे समय छिटपुट झड़पें होती रहीं। मारवाही में आक्रोशित लोगों ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के वाहन पर पथराव किया। इसी तरह रामचंद्रपुर में गृहमंत्री रामविचार नेताम ने कांग्रेस प्रत्याशी बृहस्पति सिंह को चमाचा जड़ दिया है। राजधानी में भी कांग्रेसियों ने आजाद चौक और भाजपाईयों ने खमतराई थाने का घेराव कर दिया। मारपीट के एक मामले में रायपुर दक्षिण से कांग्रेस प्रत्याशी योगेश तिवारी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
राजधानी रायपुर मंे कहीं प्रतिद्वंद्वी पार्टियों के कार्यकर्ता उलझे तो कहीं पर मतदान केंद्रों में तैनात जवानों के साथ बहस की स्थिति निर्मित हुई। मौके पर तत्काल पुलिस के पहॅुंचने के कारण स्थिति नियंत्रित कर ली गईं। दिन में हुए विवाद के चलते शाम को पार्टी कार्यकर्ताओं ने खमतराई, पुरानी बस्ती और आजाद चौक थाने का घेराव कर दिया।
नगर निगम अध्यक्ष पर तनी बंदूकें
पश्चिम सीट के रामसागरपारा स्थित सिंधी स्कूल में सुबह करीब आठ बजे वहॉं तैनात सीआईएसएफ के जवानों और नगर निगम सभापति रतन डागा के साथ जमकर विवाद हुआ। चार-पॉंच जवानों ने उन पर बंदूकें तानकर गोली मारने की धमकी दी। श्री डागा ने बताया कि जिन मतदाताओं के पास मतदाता परिचयपत्र नहीं था, लेकिन मतदान पर्ची रखी थी, उन्हें भी मतदान केंद्र के भीतर नहीं जाने दिया जा रहा था। इस वजह से रोड पर करीब 150 मतदाताओं की भीड़ लग गई थी। जवानों ने उन्हें भी गोली मारने की धमकी दी। इसकी सूचना मिलने पर श्री डागा मतदान केंद्र पहॅुंचे। वे केंद्र प्रभारी से चर्चा करने के लिए भीतर जाने लगे तो उन्हें भी गेट पर रोक लिया गया। इससे उनकी बहस हो गई। करीब आधे घंटे के विवाद के बाद केंद्र प्रभारी बाहर आए और मतदान पर्ची वाले मतदाताओं को भीतर जाने दिया गया।
जवानों की सख्ती से गरमाया माहौल
मतदान केंद्रों में जवानों की सख्ती के कारण कई जगहों पर माहौल गरमाया। सुबह करीब सवा दस बजे खमतराई स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला मतदान केंद्र में कुछ कांग्रेस कार्यकर्ता पार्टी का बैच लगाकर और गले में गमछा डालकर प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसने लगे। वहॉं तैनात सीआईएसएफ के जवानों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इस पर कार्यकर्ताओं ने जवानों पर भाजपा कार्यकर्ताओं पर सख्ती नहीं करने का आरोप लगाया। इससे बहस की स्थिति निर्मित हो गई थी। डगनिया स्कूल में भाजपा कार्यकर्ता नवीन शर्मा बूथ के भीतर एजेंटों को नाश्ता देने जा रहे थे तो जवानों ने उन्हें रोक लिया। इस कारण विवाद हो गया।
सपा प्रत्याशी और भाजपा कार्यकर्ता पर जुर्म दर्ज
उत्तर सीट के मौदहापारा में शाम करीब चार बजे समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी अनवर हुसैन और भाजपा कार्यकर्ता मानसिंह के बीच मारपीट हुई। इसके बाद दोनों पार्टियों के समर्थक मौदहापारा थाना पहॅुंचे। पुलिस ने दोनों के खिलाफ मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का जुर्म दर्ज कर लिया है। बताया गया है कि अनवर और मानसिंह के बीच पुरानी रंजिश भी है।
समर्थकों के साथ मतदान केंद्र में घुसे प्रत्याशी
रायपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के मोवा इलाके में सुबह करीब 11 बजे तनाव की स्थिति बन गई थी। एक राष्ट्रीय स्तर की पार्टी के प्रत्याशी दो दर्जन समर्थकों के साथ मतदान केंद्र के भीतर घुस गए। इससे भीतर गहमागहमी का माहौल बन गया। दूसरी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई और बूथ एजेंटों से उन्हें बाहर निकालने की मॉंग करने लगे। इस कारण दोनों पार्टी के कार्यकर्ता आमने-सामने हो गए। गुस्साए भाजपाइयों ने रोड जाम कर दिया। सुरक्षा में तैनात बल ने उन्हें जबरन रोड से हटाया। इसके बाद भी तनावपूर्ण स्थिति बनी रहने के कारण वहॉं अतिरिक्त बल तैनात किया गया।
ग्रामीण सीट में छिटपुट घटनाऍं
ग्रामीण विधानसभा सीट के उरकुरा, सरोरा, उरला, गोगांव, तेलीबांधा और टिकरापारा के मतदान केन्द्रों में छिटपुट घटनाऍं हुईं। उरला में फर्जी वोटिंग की आश्ांका के चलते भाजपा और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में बहस हुई। सरोरा में ईवीएम के एक बटन विशेष में करंट आने की बात कर रहे कुछ लोगों को एक राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ताओं ने खदेड़ा। इसी तरह तरपोंगी, डूंडा, सेजबहार और बोरियाखुर्द में मतदान केन्द्र के अंदर जबरन घुसने को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच बहस हुई।
पैसे बांॅटते दबोचे गए चार कार्यकर्ता
मतदान के दौरान उरला और उरकुरा में वोटरों को पैसे बांॅटते चार लोगों को पकड़ा गया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि यह सब विरोधी पार्टी के लोगों द्वारा वोटरों को प्रभावित करने के लिए किया गया है। नोट बांॅटने वालों को भी भाजपाई कार्यकर्ताओं ने ही पकड़ा। घटना की सूचना उरला और खमतराई थाने में दी गई है।
तीन थानों का घेराव
ग्रामीण सीट में दोपहर करीब साढ़े बारह बजे बिरगॉंव स्कूल के पास झड़प हुई। यहॉं एक भाजपा समर्थक और नगर पालिका परिषद में नेता प्रतिपक्ष प्रेमशंकर राव के साथ कांग्रेसियों ने हाथपाई की। पुलिस अफसरों के अनुसार कुछ कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने भाजपा समर्थक डॉ. शकील पर वोटरों को बरगलाने का आरोप लगाते हुए बहस शुरू कर दी। मामला हाथापाई तक पहुॅंच गया। इस दौरान बीच-बचाव करने पहुॅंचे श्री राव पर भी कांग्रेसी टूट पड़े। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर बड़ी संख्या में दोनों पार्टियों के समर्थक एकत्र होकर नारेबाजी करने लगे। माहौल बिगड़ता देख बीच बचाव के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। गुस्साए लोगों ने पुलिस पर पक्षपात करने का आरोप लगाया। घटना के संबंध में उरला पुलिस ने तीन कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को खिलाफ जुर्म दर्ज किया है। दक्षिण सीट के कुछ बूथों में गहमागहमी का माहौल रहा। सुंदरनगर स्कूल में शाम सवा चार बजे फर्जी वोटिंग को लेकर भाजपा व कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई। स्कूल में छह बूथ थे। मतदाताओं के साथ कार्यकर्ताओं के भीतर जाने की बात को लेकर विवाद शुरू हुआ और हाथपाई की नौबत आ गई। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी भी की। तनाव बढ़ने पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के पूर्व पार्षद मृत्युंजय दुबे के साथ धक्का-मुक्की करने लगे। इस बीच कांग्रेस प्रत्याशी योगेश तिवारी समर्थकों के साथ पहुँच गए। बीच-बचाव के दौरान माहौल गरमा गया और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ। कुछ देर बाद भाजपा प्रत्याशी बृजमोहन अग्रवाल भी मौके पर पहुँच गए। मतदान निपटने के बाद शाम करीब छह बजे महापौर सुनील सोनी समेत करीब डेढ़ सौ भाजपा कार्यकर्ता पुरानी बसती चौक थाना पहॅुंचे और श्री दुबे के साथ धक्का-मुक्की करने वालों पर जुर्म दर्ज करने की मॉंग की। पुलिस उन्हें बताया गया घटनास्थल आजाद थाना क्षेत्र में आता है। इसके बाद भाजपाई वहॉं पहॅुंचे और थाने का घेराव किया। इसी तरह संतोषीनगर में श्रद्धा स्कूल व संजयनगर में नूतन स्कूल के पास दोपहर तीन बजे मतदाताओं की भीड़ अधिक होने के कारण गहमागहमी का माहौल रहा। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठी लहरानी पड़ी।
बेवकूफ बनती रही पुलिस
मतदान केंद्रों के बाहर शहर की सुरक्षा पुलिस को संभालना था। इस कारण बुधवार की रात से ही पुलिस के सभी अफसरों को पेट्रोलिंग पर लगाया गया था। रातभर पुलिस कंट्रोल रूम में शराब, कम्बल, पैसे व अन्य सामान बंॅटने के अतिरिक्त मारपीट की भी सूचना दी गई। पुलिस मौके पर पहॅुंची तो ज्यादातर सूचनाऍं फर्जी निकलीं अथवा मामूली विवाद। गुस्र्वार की सुबह सात बजे से कलेक्टर विकासशील, एसपी अमित कुमार समेत सभी एडिशनल एसपी, सीएसपी और टीआई मतदान केंद्रों के अलावा सार्वजनिक और संवेदनशील स्थानों का भ्रमण करते रहे। बताया गया है कि इस दौरान कंट्रोल रूम के फोन और अफसरों के मोबाइल शिकायतों के कारण पूरे समय व्यस्त रहे।